Class 8 SS Civics Chapter 4 Judiciary notes in Hindi Medium
Class 8 SS Civics Chapter 4 Judiciary notes in Hindi Medium
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Class 8 SS Civics Chapter 4 Judiciary notes in Hindi Medium
कक्षा 8 नागरिक शास्त्र अध्याय 4 न्यायपालिका के नोट्स हिन्दी माध्यम में
पाठ की
महत्वपूर्ण शब्दावली
1- बरी करना- जब
अदालत किसी व्यक्ति को उन आरोपों से मुक्त कर देती हैं जिनके आधार पर उसके खिलाफ़
मुकदमा चलाया गया था तो उसे बरी करना कहा जाता है।
2- अपील
करना- निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध जब कोई पक्ष उस
पर पुनर्विचार के लिए ऊपरी न्यायालय में जाता है तो इसे अपील करना कहा जाता है।
3- मुआवजा- किसी
नुकसान या क्षति के भरपाई के लिए दिए जाने वाले पैसे को मुआवजा कहा जाता है।
4- बेदखली- अभी लोग
जिस जमीन या मकान में रह रहे हैं, यदि उन्हें वहाँ से हटा दिया जाता है तो इसे
बेदखली कहा जाएगा।
5- उल्लंघन- किसी
कानून को तोड़ने या मौलिक अधिकारों के हनन की क्रिया का उल्लंघन कहा गया है।
6- भारत में अदालतों के तीन स्तर हैं-
1) जिला अदालत 2) उच्च न्यायालय 3)सर्वोच्च
न्यायालय।
7- कानूनों को दो भागों में बांटा
जाता है- 1) फौजदारी कानून और 2) दीवानी कानून।
8- फौजदारी
कानून- ये उन क्रियाओं से संबंधित है जिन्हें कानून में
अपराध माना जाता है। उदाहरण के लिए चोरी,
दहेज उत्पीड़न, हत्या आदि। इनमें आमतौर पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज
कराई जाती है और दोषी को जेल भेजा जाता है।
9- दीवानी कानून- इनका संबंध व्यक्ति
के अधिकारों के उल्लंघन या अवहेलना से होता है। उदाहरण के लिए जमीन की बिक्री का
विवाद, किराया, तलाक आदि। इसमें पीड़ित व्यक्ति की ओर से मुकदमा दायर किया जाता है
और अदालत पीड़ित पक्ष को राहत की व्यवस्था करती है।
10- FIR- (First Information Report)- प्रथम सूचना रिपोर्ट या प्राथमिकी
11- PIL (Public Interest Litigation)- जनहित
याचिका
12- भारत का उच्चतम न्यायालय कानून से
संबंधित मामलों में राष्ट्रपति को सलाह देता है।
13- उच्चतम
न्यायालय के न्यायाधीशों की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष होती है। तथा उच्च न्यायालय
के न्यायाधीशों की 62 वर्ष होती है।
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अभ्यास के प्रश्नोत्तर-
प्रश्न 1- आप पढ़ चुके हैं कि कानून
को कायम रखना और मौलिक अधिकारों को लागू करना न्यायपालिका का मुख्य काम होता है।
आपकी राय इस महत्वपूर्ण काम को
करने के लिए न्यायपालिका का स्वतंत्र होना क्यों जरुरी है?
उत्तर 1- कानून को कायम रखना और
मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए न्यायपालिका का स्वतंत्र होना अति आवश्यक है।
इसे निम्न बिंदुओं से स्पष्ट कर सकते हैं-
1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता अदालतों
को भारी ताकत देती है।
2) इस ताकत के आधार पर ही वे विधायिका
और कार्यपालिका द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग रोक सकती हैं।
3) यदि न्यायाधीश नेताओं के नियंत्रण
में रहेंगे तो वे स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पाएंगे। और वे नेताओं के पक्ष में ही
निर्णय लेने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
प्रश्न 2- अध्याय 1 में मौलिक
अधिकारों की सूची दी गयी है। उसे फिर से पढ़ें। आपको ऐसा क्यों लगता है कि
संवैधानिक उपचार का अधिकार न्यायिक समीक्षा के विचार से जुड़ा हुआ है?
उत्तर 2- भारतीय संविधान में नागरिकों
को निम्न मौलिक अधिकार दिए गए हैं-
1) समानता का अधिकार
2) स्वतंत्रता का अधिकार
3) शोषण के विरुद्ध अधिकार
4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
5) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार
6) संवैधानिक उपचार का अधिकार
संवैधानिक उपचार का अधिकार नागरिकों
को मौलिक अधिकारों का हनन होने पर न्यायालय जाने
का अधिकार प्रधान करता है। इसी तरह यदि न्यायपालिका को ऐसा लगे कि संसद द्वारा
पारित कोई कानून संविधान के आधारभूत ढाँचे का उल्लंघन करता है तो वह उसे रद्द कर
सकती है। इसी को न्यायिक समीक्षा कहा जाता
है। अतः ये दोनों विचार एक दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि ये दोनों ही नागरिकों के
मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।
प्रश्न 3- नीचे तीनों स्तरों में
न्यायालय को दर्शाया गया है। प्रत्येक के सामने लिखिए कि उस न्यायालय ने सुधा गोयल के मामले में क्या फैसला
दिया था? अपने
जवाब को कक्षा के अन्य विद्यार्थियों को दोबारा मिलाकर देखें।
उत्तर 3-
a) निचली अदालत- गवाहों के बयानों और
साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने सुधा गोयल के पति लक्ष्मण, उसकी सास शकुंतला
और सुधा के जेठ सुभाष चंद्र को दोषी करार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी।
b) उच्च न्यायालय- उच्च न्यायालय नें
वकीलों के तर्क सुनने के बाद फैसला लिया कि सुधा गोयल की मौत एक दुर्घटना थी और उन
तीनों को बरी कर दिया।
c) उच्चतम न्यायालय- सर्वोच्च न्यायालय
ने लक्ष्मण और उसकी माँ को दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की
सज़ा दी। लेकिन सुभाष चंद्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण बरी कर दिया।
प्रश्न 4- सुधा गोयल के मामले को
ध्यान में रखते हुए नीचे दिए गए बयानों को पढ़िए। जो वक्तव्य सही है उन पर सही का
निशान लगाइये और जो गलत है उन्हें ठीक कीजिए।
a) उत्तर 4- 1) आरोपी इस मामले को उच्च न्यायालय लेकर गए क्योंकि वे निचली अदालत में फैसले से सहमत नहीं थे। = सही
2) वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ़ उच्च न्यायालय में चले गए। = गलत, वे निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में गए थे।
c) 3) अगर आरोपी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो दोबारा निचली अदालत में जा सकते हैं। = गलत। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ कहीं ओर अपील नहीं की जा सकती है।
प्रश्न 5 आपको ऐसा क्यों लगता है कि
1980 के दशक में शुरू जनहित याचिका की व्यवस्था सबको इंसाफ
दिलाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम थी।
उत्तर 5- 1980 के दशक में शुरू की गई
जनहित याचिका (PIL) की
व्यवस्था सबको न्याय दिलाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम थी। इसके निम्न कारण
हैं-
1)
PIL के माध्यम से न्याय
तक अधिकतम व्यक्तियों की पहुँच हो गई।
2)
इसके जरिए कोई भी अन्य व्यक्ति या
संस्था किसी में अधिकारों का उल्लंघन होने पर उनकी तरफ से जनहित याचिका दायर कर
सकते है।
3)
इससे कानूनी प्रक्रिया आसान हुई।
4)
सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय
के नाम से भेजे गए पत्र को भी जनहित याचिका माना जा सकता है।
5)
जनहित याचिकाओं के द्वारा कई
मुद्दों पर लोगों को न्याय दिलाया जा चुका है।
प्रश्न 6- ओल्गा टेलिस बनाम मुंबई
नगर निगम मुकदमे में दिए गए फैसले के अंशों को दोबारा पढ़िए। इस फैसले में कहा गया
है कि आजीविका का अधिकार जीवन का अधिकार का हिस्सा हैं। अपने शब्दों में लिखिए कि
इस बयान से जजों का क्या मतलब है।
उत्तर 6- इस बयान से जजों का अर्थ था
कि जीवन का अधिकार का एक महत्वपूर्ण पहलू आजीविका का अधिकार भी है क्योंकि आजीविका
के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। किसी व्यक्ति को झुग्गी-बस्ती से उजाड़ देने
पर उसके आजीविका के साधन फौरन नष्ट हो जाते हैं।
प्रश्न 7 ‘इंसाफ में देरी यानी इंसाफ
का कत्ल’ इस विषय पर एक कहानी बनाइए।
उत्तर- भारतीय न्यायपालिका का सबसे बाद
मुद्दा यह है कि अदालतें मुकदमे की सुनवाई में कई साल लगा देती हैं। और इस अवधि में
पीड़ित न्याय की आशा में ये दुनिया ही छोड़ के चला जाता
है। इसी वजह से कहा जाता है कि ‘इंसाफ में देरी यानि इंसाफ का कत्ल’ होती है।
कहानी- एक व्यक्ति ने अपना मकान किसी
को किराये पर दे दिया। कुछ साल बाद जब मकान मालिक ने अपना मकान खाली करवाने के लिए
कहा तो किरायेदार ने मकान खाली करने से मना कर दिया। मकान मालिक ने कोर्ट
में केस कर दिया। 5 साल बाद जब मकान मालिक के हक में फैसला आया तो किरायेदार ने उच्च
न्यायालय में अपील दायर कर दी। अब ये मुकदमा भी कई साल से चल रहा है। इस प्रकार से मकान मालिक, मकान का स्वामी होने के
बावजूद अपने घर में नहीं रह प रहा है। इस प्रकार यह कहना उचित ही है कि इंसाफ में देरी
यानि इंसाफ का कत्ल होती है।
प्रश्न 8 निम्न शब्द संकलन में दिए
गए प्रत्येक शब्द से एक वाक्य बनाएँ।
1) बरी करना (रिहा करना)- मोहन को
चोरी के आरोप से बरी कर दिया गया।
2) अपील करना (प्रार्थना करना)- राम
ने अपने खिलाफ़ मुकदमे का फैसला अपने पक्ष में न आने की वजह से उच्च न्यायालय में
अपील दायर की।
3) मुआवजा (क्षतिपूर्ति)- किसानों को
बारिश के कारण फसल बर्बाद होने की वजह से मुआवजा दिया गया।
4) बेदखली (हटाना)- कहना न मानने की
वजह से पिता ने पुत्र को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया।
5) उल्लंघन (नियम
तोड़ना)- हमें यातायात के नियमों का उल्लंघन नहीं करना
चाहिए।
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प्रश्न 9 - यह पोस्टर भोजन अधिकार
अभियान द्वारा बनाया गया है।
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इस पोस्टर को पढ़कर भोजन के अधिकार के
बारे में सरकार के दायित्वों की सूची बनाएँ। इस पोस्टर में कहा गया है कि भूखे पेट
भरे गोदाम नहीं चलेगा नहीं चलेगा इस वक्तव्य के पृष्ठ। 55 पर भोजन के अधिकार के
बारे में चित्र निबंध से मिलाकर देखिए।
उत्तर 9- भोजन के अधिकार के बारे में
सरकार के दायित्व-
1) सबको भोजन उपलब्ध करवाना सरकार का
दायित्व है।
2) सरकार नए रोजगार पैदा करे और राशन
की सरकारी दुकानों के माध्यम से सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध करवाए।
3) विद्यालयों में बच्चों को
दोपहर का भोजन (MDM=Mid-Day-Meal) दिया जाए।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 10- विधि व्यवस्था की
विभिन्न शाखाओं में क्या अंतर है?
अथवा
फौजदारी और दीवानी कानून में क्या अंतर
है?
उत्तर 10- इनमें निम्न अंतर है-
|
फौजदारी
कानून |
दीवानी
कानून |
|
1) ये ऐसे
व्यवहार से संबंधित हैं जिन्हें कानून में अपराध माना गया है। |
इनका संबंध
किसी व्यक्ति के अधिकारों के उल्लंघन से होता है। |
|
2) इसमे
सर्वप्रथम FIR होती है
और पुलिस अपराध की जांच करती है। |
इसमें पीड़ित
पक्ष की ओर से न्यायालय में एक याचिका दायर की जाती है। |
|
3- अगर
व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भेजा जाता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता
है। |
इसमें अदालतें पीड़ित
पक्ष को राहत प्रदान करती हैं। |
|
4- उदाहरण-
चोरी, दहेज प्रताड़ना, हत्या आदि। |
उदाहरण-
जमीन की बिक्री, मकान मालिक और किरायेदार का विवाद और तलाक का मुकदमा आदि। |
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