Class 8 SS Chapter 4 Chhatrapati shivaji and the peshwa notes in Hindi

 Class 8 SS Chapter 4 Chhatrapati Shivaji and the peshwa notes in Hindi

Class 8 SS Chapter 4 Chhatrapati shivaji and the peshwa notes in Hindi
Class 8 SS Chapter 4 Chhatrapati shivaji and the peshwa notes in Hindi


पाठ के महत्वपूर्ण बिंदु

1- राइज़ ऑफ द मराठा पावर पुस्तक की रचना महादेव गोविंद रानाडे ने की थी।

2- शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी को पूना में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इनके पिताजी का नाम शाहजी भोसले था। और इनकी माता का नाम जीजाबाई था।

3- शिवाजी का राज्याभिषेक 6 जून 1974 को पंडित गंगा भट्ट द्वारा किया गया।

4- बीजापुर के सेनापति अफजल खान ने शिवाजी को गले लगाने के बहाने कटार से वार करने का प्रयास किया, लेकिन शिवाजी ने बाघ-नख से अफजल खान को मार गिराया।

5- मुगल सेनापति राजा जयसिंह एवं शिवाजी के माध्यम 22 जून 1665 को पुरंदर की संधि हुई।

6- 14 जनवरी 1761 ईसवी को मराठों एवं अहमद शाह अब्दाली के मध्य पानीपत का तृतीय युद्ध हुआ।

7- मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम ने 1739 ईस्वी में पुर्तगाल लियो से बसीन द्वीप को छीन लिया था।

8- शिवाजी के गुरु का नाम समर्थ गुरु रामदास था।

9- शिवाजी का देहांत 3 अप्रैल 1680 ईस्वीमें हुआ। इनकी मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र शंभाजी को राजा बनाया गया।

10- 1719 ईसवी की मराठा-मुगल संधि को रिचर्ड टेम्पल ने मराठा-मेग्नाकार्टा था।

11- मराठा राज्य में प्रधानमंत्री को पेशवा के नाम से जाना जाता था।

12- छत्रपति - शिवाजी के समय स्वयं महाराजा प्रशासन का केंद्र बिंदु होता था। महाराजा प्रमुख रूप से छत्रपति की उपाधि धारणा करता था।

13- अष्टप्रधान परिषद- शिवाजी ने प्रशासन में सहायता व परामर्श के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद नियुक्त की थी। इसे ही अष्टप्रधान कहा जाता था। इसका प्रमुख कार्य राजा को परामर्श देना मात्र था।

14- बलपूर्वक धर्मांतरण- जनता को डरा-धमकाकर उन्हें धर्म बदलने पर मजबूर करना बलपूर्वक धर्मांतरण करना कहा जाता था।

15- गुरिल्ला युद्ध- भारत में गोरिल्ला युद्ध के जनक छत्रपति शिवाजी महाराज थे। इस प्रकार के युद्ध में एक छोटी और कम संख्या वाली सेना एक बड़ी सेना से भर्ती हैं और छिपकर वार करती है।

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रिक्त स्थान भरें-

1)       ‘राइज़ ऑफ मराठा पावर’ पुस्तक ________ ने लिखी।

2)       ‘पुरंदर की संधि’ के समय विदेशी इतिहासकार ________ उपस्थित था।

3)       शिवाजी की माता का नाम ________ था।

4)       __________ को ‘मराठा मेग्नाकार्टा’ कहा जाता है।

5)       राज्याभिषेक के अवसर पर शिवाजी ने ________ उपाधि धरण की।

 (उत्तर : 

1- महादेव गोविंद रानाडे 

2- ____ 

3- जीजाबाई 

4- 1719 की मराठा-मुगल संधि 

5- छत्रपति)

उचित मिलान करें-

            

1- शिवाजी का राज्याभिषेक

I- विदेश मंत्री

2- बाजीराव प्रथम

II- सदाशिव राव भाऊ

3- पानीपत का तीसरा युद्ध

III- शाह जी भोंसले

4- सुमंत

IV- महान मराठा योद्धा

5- शिवाजी का पिता

V- 6 जून 1674 ईस्वी

 उत्तर-

(1-V  2-IV  3-II  4-I  5-III)

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अभ्यास के प्रश्नोत्तर -

  

प्रश्न 1 छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन परिचय बताएं?
उत्तर : छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी को पुणे के प्रसिद्ध शिवनेरी किले में हुआ था। इनके पिताजी का नाम शाहजी भोसले था, जो मराठा सरदार थे और इनकी माताजी का नाम जीजाबाई था। इनके गुरुजी का नाम समर्थ रामदास था। 
माता जीजाबाई शिवा जी को बाल्यकाल से रामायण, महाभारत एवं भारतीय वीरात्माओं की कहानियाँ सुनाती थी, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने शिवाजी को धर्म, संस्कृति एवं राजनीति की शिक्षा भी प्रदान की। दादा कोंडदेव ने घुड़सवारी, तलवारबाजी व निशानेबाजी की शिक्षा दी। 
1643 ईस्वी में शिवाजी ने सर्वप्रथम 'सिंहगढ़' का किला जीता। इसके बाद 1646 में तोरण दुर्ग पर अपना अधिकार कर लिया। जब अफजल खां ने गले मिलने के बहाने शिवाजी के मारने की कोशिश की तो शिवाजी ने बाघ-नख  अफजल खां को मार गिराया। 
6 जून 1674 ईस्वी में शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया और उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की। शिवाजी सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उनके साम्राज्य में समानता, स्वतंत्रता व भ्रातृ-भाव था। लंबी बिमारी के कारण 3 अप्रैल 1680 ईसवी को उनका देहांत हो गया। इनकी मृत्यु के पश्चात इनके पुत्र संभाजी को राजा बनाया गया। 
शिवाजी महाराज एक महान योद्धा व कूटनीतिज्ञ थे। छत्रपति शिवाजी को उनके अदम्य साहस, बुद्धिमता व कुशल शासन के लिए याद किया जाता है।

प्रश्न 2- हिंदू स्वराज की स्थापना हेतु शिवाजी महाराज के संघर्ष का वर्णन करें।
उत्तर- शिवाजी का राज्यभिषेक 6 जून 1674 ईसवी को हिंदू रीती-रिवाजों से किया गया था और उन्हें छत्रपति की उपाधि धारण की। शिवाजी का राज्याभिषेक वह हिंदवी स्वराज्य की स्थापना 17वीं शताब्दी के भारतीय इतिहास की अभूतपूर्व और सबसे प्रभावशाली घटना थी। इससे एक स्वतंत्र वैधानिक मराठा राज्य का उदय हुआ। इस राज्य में राज़, व्यवहार कोष तैयार किया गया। नया संवत चलाया गया। शुक्राचार्य व कौटिल्य को आदर्श मानकर नियम कानून बनाए गए। सोने और तांबे की मुद्राएं जारी की गई। जिन पर 'श्री शिव छत्रपति' अंकित था। शिवाजी महाराज ने हिंदू स्वराज की स्थापना हेतु अनेकों युद्ध लड़े और विजय प्राप्त की।
 
प्रश्न 3- पेशवा बाजीराव प्रथम के संघर्ष और योगदान का वर्णन करें।
उत्तर- अपने पिता के बाजीराव विश्वनाथ की मृत्यु के पश्चात 'बाजीराव प्रथम' पेशवा बना। छोटी आयु का होने पर भी बाजीराव तीव्र बुद्धि और बलवान शरीर के थे। वे राजनीतिक और शासन कार्यों में दक्ष थे। बाजीराव प्रथम को लड़ाकू पेशवा के रूप में स्मरण किया जाता है। बाजीराव प्रथम ने हिंदू पादशाही का आदर्श रखा। बाजीराव ने राज्य की सेना के पुनः संगठित किया और 1731 ईस्वी में बुंदेलखंड के विजय किया। मुसलमानों के संयुक्त सेना को भोपाल में हराकर पेशवा ने मराठों की सैनिक शक्ति को सारे भारतवर्ष में श्रेष्ठ सिद्ध कर दिया था। मराठों ने पुर्तगालियो से 1739 ईस्वी में बसीन का द्वीप छीन लिया। 1740 में बाजीराव प्रथम मराठा शक्ति की नींव दृढ करके चल बसे।

प्रश्न 4- मराठों के प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं कौन कौन सी थी?
उत्तर-  शिवाजी के समय में मराठा प्रशासन का स्वरूप अत्यधिक विस्तृत था। प्रशासन को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए निम्न विभागों की सरंचना की गई थी।
1- छत्रपति- शिवाजी के समय स्वयं महाराजा प्रशासन का केंद्र बिंदु होता था। महाराजा प्रमुख रूप से छत्रपति की उपाधि धारण करता था।
2- पेशवा-  यह राजा का प्रधानमंत्री होता था और राजा के अनुपस्थिति में उसके कार्यों की देखभाल करता था।
3- अष्टप्रधान परिषद- शिवाजी ने प्रशासन से सहायता व परामर्श के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद नियुक्त की। इसे अष्ट-प्रधान परिषद कहा जाता था। इसका प्रमुख कार्य राजा को परामर्श देना मात्र था।
4- राजस्व व्यवस्था- मराठा राज्य की आय का प्रमुख साधन कृषि कर तथा अन्य कर थे। सरदेशमुखी कर के रूप में किसानों के उत्पादन का 10 वां भाग वसूला जाता था। दूसरा महत्वपूर्ण आय का साधन चौथ नामक कर था। यह पड़ोसी राज्य से उसकी आय का एक चौथाई (1/4) भाग के रूप में वसूला जाता था।
5- सेना व्यवस्था- शिवाजी के समय मराठों के पास एक अत्यंत शक्तिशाली सेना थी, जिसका वेतन शाही खजाने से दिया जाता था। मराठा सेना में पदाति घुड़सवार प्रमुख थे।
6- न्यायप्रणाली- मराठा साम्राज्य में न्याय प्राचीन भारतीय परंपराओं के अनुसार किया जाता था। शिवाजी का न्यायालय धर्मसभा या हुजूर-हाजिर मजलिस कहा जाता था। गांव के झगड़ों का फैसला पंचायत करती थी। मराठों की न्याय प्रणाली काफी कठोर व सुधारात्मक थी।

प्रश्न 5- मराठों की भू राजस्व व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर- मराठा राज्य की आय का प्रमुख साधन कृषि कर तथा अन्य कर थे। सरदेशमुखी कर के रूप में किसानों के उत्पादन का 10 वां भाग वसूला जाता था। दूसरा महत्वपूर्ण आय का साधन चौथ नामक कर था। यह पड़ोसी राज्य से उसकी आय का एक चौथाई भाग के रूप में वसूला जाता था। इसके अलावा गृहकर, सिंचित भूमि कर, सीमा शुल्क आदि राज्य की आय के प्रमुख साधन थे।


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